Thursday, November 24, 2011
Saturday, September 24, 2011
सुनहरी धूप

दोस्तों आज बालिका दिवस है उन्हीं को समर्पित मेरी ये पंक्तिया
सुनहरी धूप
सुनहरी धूप सी होती हैं बेटियाँ
संस्कृति की पहचन होती बेटियाँ
शाम की खामोशियों में खोई हुई
ओस की बूँद सी होती हैं बेटियाँ
कुछ तो वजह है मुस्कुराने की
दिल के बेहद करीब होती हैं बेटियाँ
चहकने से उनके होती है सुबह
गार्गी सीता सी होती हैं बेटियाँ
अब तो आकड़े बता रहे हैं कथा
समाज में असाह हो रहीं हैं बेटियाँ
दिल में आह का दर्द लिये हुए भी
खुशियों का जहान होती हैं बेटियाँ
सुनहरी धूप
सुनहरी धूप सी होती हैं बेटियाँ
संस्कृति की पहचन होती बेटियाँ
शाम की खामोशियों में खोई हुई
ओस की बूँद सी होती हैं बेटियाँ
कुछ तो वजह है मुस्कुराने की
दिल के बेहद करीब होती हैं बेटियाँ
चहकने से उनके होती है सुबह
गार्गी सीता सी होती हैं बेटियाँ
अब तो आकड़े बता रहे हैं कथा
समाज में असाह हो रहीं हैं बेटियाँ
दिल में आह का दर्द लिये हुए भी
खुशियों का जहान होती हैं बेटियाँ
Sunday, July 31, 2011
सुबह की मुस्कान
Friday, June 17, 2011
Sunday, May 8, 2011
Tuesday, April 12, 2011
जीने लगा हूँ मैं
जीने लगा हूँ मैं
जबसे प्यार करने लगा हूँ मैं
अपने से दूर रहने लगा हूँ मैं
भूल जाता हूँ मैं सारे गमों को
जबसे तेरे साथ जीने लगा हूँ मैं
आज दूर से आती है तेरी महक
तेरी रौनाईयों में जीने लगा हूँ मैं
चारो तरफ नज़र आती हो तुम
चाँद तारों को देखने लगा हूँ मैं
मैं तो हर हाल में जी लूँगा
सारे गम अब सहने लगा हूँ मैं
तुम मुझसे दूर नहीं रह सकती
तुझे आईने में देखने लगा हूँ मैं
तू क्या जाने मुहब्बत के पैगाम मनु
तुम्हें हर साँस में जीने लगा हूँ मैं
Saturday, April 2, 2011
चाँद के बहाने
Subscribe to:
Posts (Atom)




